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इस बार चतुर्मास क्यों है खास

165 साल बाद नवरात्र का अद्भुत संयोग, इस बार चतुर्मास क्यों है खास

भारत के जाने-माने ज्योतिषाचार्य Astro Dino ने बताया कि इस बार 165 साल बाद नवरात्र का अद्भुत संयोग बन रहा है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार नवरात्र का आरंभ पितृपक्ष के तुरंत समाप्ति के बाद नहीं होगा। इस महत्वपूर्ण संयोग की गणना Astrology vigyan से करते हुए उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के एक महीने बाद नवरात्र का आरंभ होगा।
Astro Kavach के संस्थापक Astro Dino ने इस संयोग को अद्भुत बताया। उन्होंने कहा कि अश्वनी महीने में श्राद्ध पक्ष 1 सितंबर से आरंभ हो रहा है जो 17 सितंबर तक चलेगा। हर बार श्राद्ध पक्ष के समाप्ति के अगले दिन से ही नवरात आरंभ हो जाता है लेकिन इस बार नवरात्र का आरंभ 17 अक्टूबर से होगा। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि 17 सितंबर के बाद से 1 महीने तक मलमास होने के कारण शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर को शुरू होगा। ज्योतिष गणना के अनुसार ऐसा समय 165 साल बाद आता है।

वैभव और संपदा प्राप्ति का चतुर्मास संयोग

ज्योतिषाचार्य Astro Dino ने मलमास के बारे में बताते हुए कहा कि एक महीने में लीप वर्ष और अधिक महीने के कारण यह स्थिति 165 साल बाद पड़ रही है। ‌ इसलिए इस चातुर्मास में विवाह मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। लेकिन इस एक माह में पूजन पाठ और व्रत साधना का बहुत ही खास महत्व है। मलमास के इस 1 महीने के दौरान देव सो जाते हैं और देवउठनी एकादशी के बाद देवता जाग्रत होते हैं। इस बार यह मलमास 17 सितंबर के अगले दिन से 16 अक्टूबर तक चलेगा। ज्योतिषाचार्य Dino ने बताया कि 17 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि के व्रत का इस बार शक्ति और धन प्राप्त करने का प्रभावशाली समय है। 26 अक्टूबर को दशहरा और इसी क्रम में 14 नवंबर को दीपावली होगी। इसके पश्चात 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ ही चतुर्मास समाप्त हो जाएगा।
Astro Dino ने बताया कि इस चतुर्मास में पूजा-पाठ और व्रत का महत्व इस बार भक्तों को कई गुना मिलेगा क्योंकि इस बार 165 साल बाद सुनहरा अद्भुत योग बन रहा है। वैभव और संपन्नता के लिए किया गया पूजा पाठ भक्तों को अन्य, धन-धान और स्वास्थ्य लाभ से भर देगा।

मलमास क्या होता है?

मलमास का मतलब अधिक मास यानी बढ़ा हुआ महीना। Astro Dino बताते हैं कि धरती 1 साल में 365 दिन और करीब 6 घंटे में अपना एक साल पूरा करती है जबकि चंद्रमा सूर्य का चक्कर लगाते हुए अपना 1 साल 354 दिनों में पूरा करता है। सूर्य के सापेक्ष धरती और चंद्रमा के 1 साल के बीच में 11 दिन का लगभग अंतर आता है, जो यह 3 साल में 1 महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को दूर करने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त चंद्रमास आता है। इससे अधिक मास कहा जाता है और जन सामान्य भाषा में मलमास कहा जाता है।

पुरषोत्तमी एकादशी पूजन: पाइए अद्भुत कृपा

Astro Dino ने बताया कि अधिक मास यानी मलमास को सूर्य की संक्रांति इस महीने नहीं होती है इसलिए यह महीना मलिन हो जाता है और इस कारण से मांगलिक कार्य नहीं होता है। उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु ने मलमास को अपना नाम पुरुषोत्तम माह दिया है। हर साल 24 एकादशियां होती हैं लेकिन इस साल मलमास के कारण 26 एकादशियां होंगी। अधिमास की पहली पुरुषोत्तमी एकादशी 27 सितंबर को और दूसरी 13 अक्टूबर को होगी। इस दिन पूजा-पाठ से भगवान श्री विष्णु और लक्ष्मी की अद्भुत कृपा प्राप्त होती है। मन की इच्छाएं पूरी होती हैं। भक्तों को वरदान प्राप्त होता है क्योंकि इस बार दो पुरुषोत्तमी एकादशी पड़ रही है।

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