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कामिका एकादशी- समस्त पापों से मुक्ति देने वाली।

हिंदू धर्म धर्म शास्त्रों के एकादशी व्रत का विशेष महत्व है इस व्रत को धारण करने से श्रद्धालु के समस्त पापो से मुक्ति मिलती है ।जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, कामिका एकादशी यानी इस व्रत से भक्तजन को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। Astro Dino अनुसार एकादशी के दिन श्रद्धालुओं को तीर्थ स्थलों में दान दक्षिणा देने का चलन है।

कामिका एकादशी के महत्व
Best Astrologer के ज्ञाता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्राप्त Astro kavach के संस्थापक Astro Dino ने एकादशी तिथि के महत्त्व का जिक्र कुछ प्रकार किया है ।
1)इस एकादशी का व्रत धारण करने पर भक्त को अश्वमेध यज्ञ से मिलने वाले पुण्य के बराबर फल प्राप्त होता है ।
2)इसके अतिरिक्त जीवन में आने वाले समस्त व्याधियों दूर हो जाती है।
3) कामिका एकादशी की कथा सुनने मात्र से यज्ञ के समान फल पुण्य प्राप्त होता है
4)एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों से मुक्ति प्राप्त होती है, भगवान विष्णु सभी कष्टों को दूर करते हैं। 5)कामिका एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति की संपूर्ण महत्वकांक्षा की प्राप्ति होती है।
6) एकादशी के दिन तीर्थस्थलों में स्नान, दान का भी प्रावधान है। कामिका एकादशी व्रत के फल को अश्वमेघ यज्ञ से मिलने वाले फल के बराबर माना गया है।
7)ऐसी भी मान्यता है, कि इस व्रत को धारण करने वाले को भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा अर्चना करने से भक्तगण के पित्त प्रसन्न होते हैं।
8) ऐसी मान्यता है ,कि इस दिन जो भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना करते हैं उन्हें अलग से नाग ,गंधर्व की पूजा करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है ।

शुभ मुहूर्त एवं पारण का समय
कामिक एकादशी 15 जुलाई आरंभ रात 10 :23 मिनट
16 जुलाई रात 11 :47 मिनट पर समाप्त होगी।
व्रत का पारण 17 जुलाई को प्रातः 5 :59 मिनट से 8 : 10 के मध्य का समय .

कामिका एकादशी व्रत धारण की पूर्ण विधि
1,)एकादशी के एक दिन पूर्व ही भक्तगण को दोपहर का भोजन ग्रहण कर लेते हैं ।
2)उसके बाद रात में भोजन नहीं करने का प्रावधान है। ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि पेट में किसी भी प्रकार का अवशिष्ट भोजन ना हो
3)इस दिन व्रती को चाहिए कि एक निर्जला व्रत रखते हुए आठों पहर भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा अर्चना एवं भक्ति भजन करें।
4)इसके पश्चात अगले दिन सूर्य के निकलने से के बाद विधि विधान से पूजा पाठ करके ,ब्राह्मणों को भोजन कराएं उसके बाद व्रत का पारण करें

व्रत की अवधि में श्रद्धालुओं को किन नियमों का पालन करना चाहिए
1)धारण करने के दौरान व्रती को चाहिए ,कि वह अनाज का सेवन पूर्ण रूप से एक दिन के लिए त्याग दें
2) इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति व्रत नहीं रहता, उसके लिए भी यह बेहद जरूरी है ,कि वह एकादशी वाले दिन चावल का सेवन ना करें ।
3)इस दिन भगवान विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करने पर विशेष कृपा प्राप्त करने का विधान है ।
4)जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ इन नियमों का पालन करता है ,भगवान श्री हरि उसकी पूरी मनोकामना की पूर्ति करते हैं।

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