पापांकुशा एकादशी – समस्त पाप को हरने वाली ।

पापांकुशा एकादशी – समस्त पाप को हरने वाली ।

दशहरे के एक दिन बाद पड़ने वाले एकादशी व्रत को पापांकुशा एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। इस बार यह व्रत 27 अक्तूबर को रखा जाएगा। यह तिथि आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस एकादशी पर भगवान पद्मनाभ की पूजा करने से तप के बराबर पुण्य मिलता है। आइए जाने Astro Kavach के संस्थापक ज्योतिषाचार्य Astro Dino जी से इस व्रत की महिमा और विधि के बारे में-

पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) की महता
विश्व विख्यात ज्योतिष आचार्य Astro Dino ने बताया कि पाप के कारण इंसान को अर्थ और मोक्ष की प्राप्ति होने पर बाधा होती है। आचार्य Astro Dino कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण के अनुसार, एकादशी व्रत करने से पाप मिटते हैं। इस तरह पाप मिटने से अच्छे कर्मों की रक्षा होती है। इसलिए इस एकादशी के व्रत से मनुष्य को अर्थ (रुपया, धन) और मोक्ष की मिलता है। इस व्रत को करने से पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन ब्राह्मण को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

जपापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) व्रत का मुहूर्त

एकादशी तिथि और व्रत पारण समय
एकादशी तिथि आरंभ- 26 अक्तूबर 2020 सुबह 09:00 बजे
एकादशी तिथि समापन- 27 अक्तूबर 2020 सुबह 10:46 बजे।
व्रत पारण समय और तिथि- 28 अक्तूबर 2020 सुबह 06:30 बजे से लेकर सुबह 08:44 बजे तक।
द्वादशी तिथि समाप्त- 28 अक्तूबर 12:54 दोपहर

एकादशी व्रत रखने का तरीका (Parma Ekadashi vrat)

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। भगवान सूर्य को और अर्घ्य दें। अब अपने पितरों का श्राद्ध करें। भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर और विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। पापाकुंशा एकादशी व्रत कथा सुनिए। पूजा अर्चना के बाद ब्राह्मण को फलाहार खिलाएं और उन्हें दक्षिणा दे। ऐसा करने से आपकी पूजा सफल होती है। एकादशी व्रत द्वादशी के दिन पारण मुहूर्त में पारन करें।

पापाकुंशा एकादशी व्रत कथा (Papankusha Ekadashi Vrat Katha)

ज्योतिषाचार्य Astro Dino जी कहते हैं कि इस पापाकुंशा एकादशी व्रत कथा जरूर सुनना चाहिए।
प्राचीनकाल में क्रोधन नाम का दुष्ट बहेलिया रहा करता था। उसका सारा जीवन झूठ, छल-कपट, हिंसा से भरा हुआ था। हर दिन शराब पीता था और बुरे कामों में लगा रहता था। जब उसकी मृत्यु निकट आई तो यमराज ने अपने दूतों को उसके प्राण हरने की आज्ञा दी। जिसके बाद दूतों ने उस दुष्ट बहेलिया कहा कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है। अपनी मौत को देखकर बहेलिया डरने लगा। इसके बाद वह डरकर महर्षि अंगिरा की शरण में चला गया। उसने अंगिरा ऋषि से खूब प्रार्थना की तब उन्होंने उस पर दया दिखाते हुए उससे कहा कि पापाकुंशा एकादशी का व्रत करो, तब तुम्हारे सारे पाप मिट जाएंगे और तुम्हें ईश्वर की कृपा प्राप्त होगी। उसने विधिपूर्वक पापाकुंशा एकादशी व्रत किया और फिर वह बहेलिया मोक्ष को प्राप्त हुआ।
समस्त पापों को हरने वाली इस पापांकुशा एकादशी का व्रत सभी के पाप मिटा देती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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